Thursday, May 16, 2019

特朗普针对通讯业宣布紧急状态 华为称限制不会使美国强大

美国总统特朗普签署行政命令,宣布国家进入紧急状态,需警惕“外国敌对势力”对美国通讯系统造成的国家安全威胁。这一行政命令在华盛顿时间周三(5月15日)生效,被普遍认为意在禁止美国公司使用外国通讯设备,尤其针对中国的通讯巨头华为。

这一命令赋予美国商务部权力,禁止“对国家安全制造不可接受的风险”的相关交易。

行政命令中并未提到任何具体公司或国家的名字。但外界观察人士普遍认为,这一禁令矛头指向华为,为未来封杀华为打下法规基础。

华为5月16日向BBC中文表示,华为愿意与美国政府沟通保障产品安全的措施。

“如果美国限制华为,不会让美国更安全,也不会使美国更强大。”华为在回应中称。

白宫的相关声明指,有鉴于“外国对手积极且越来越多地制造、利用信息和通讯技术基础设施与服务的弱点”,特朗普这一总统行政命令的目标是保护美国的国家安全。

近几个月来,华盛顿针对华为的公关战并不一帆风顺。美国以华为可能被中国政府利用从事间谍活动为由,要求盟友封杀华为。澳大利亚、新西兰、日本明确顺应美国要求禁止华为参与5G网络建设,但德国、法国、匈牙利等欧洲国家对此有所保留。

根据媒体报道,美国最亲密的盟友英国考虑为华为开绿灯,允许其参与建设英国5G网络中的“非核心部分”。

华为一直否认从事间谍行动的指控。华为董事长梁华在周二(14日)表示,愿意与包括英国在内的各国政府签署不从事间谍活动的协议。

特朗普签署的行政命令援用国际紧急状态经济权力法(International Emergency Economic Powers Act),这一法案授权总统在国家面临紧急状态威胁时实行商业管制。

行政命令要求商务部会同其它政府机构,在150天内拟定一份实施计划。

同一天,美国商务部称,将把华为及70家关联企业列入“实体清单”(Entity List)。今后如果没有美国政府的批准,华为将无法向美国企业购买元器件。

这项命令将在数日内生效。

路透社援引一位美国官员称,由于华为对美国供应商的依赖,该决定将使华为难以(制造)销售部分产品。

美国商务部表示,在采取上述举措之前,美国司法部在1月公布了对华为和一些实体的起诉书,称该公司密谋向伊朗提供被禁金融服务。该部门表示,有合理的依据认定华为"从事了违反美国国家安全或外交政策利益的活动"

华为和中国回应
对于特朗普签署的紧急状态令,华为5月16日向BBC中文表示,华为是5G电信设备领域“无可比拟的领导者”,愿意与美国政府沟通保障产品安全的措施。

华为的回应称,“如果美国限制华为,不会让美国更安全,也不会使美国更强大,只会迫使美国使用劣质而昂贵的替代设备,在5G网络建设中落后于其他国家,最终伤害美国企业和消费者的利益。不合理的限制也会侵犯华为的权利,引发其他严重的法律问题。”

华为没有对美国商务部计划将其列入“实体清单”作出更具体的回应。

特朗普签署紧急状态令前一天,已有国际媒体就此询问中国外交部,发言人耿爽在5月15日回应称,“一段时间以来,美方滥用国家力量不择手段地蓄意抹黑和打压特定的中国企业,既不光彩、也不公正。对他们的动机,世人早已看得清清楚楚。我们敦促美方停止借口安全问题对中国企业进行无理打压,为中国企业在美开展正常的投资运营提供公平、公正、非歧视的环境。”

早在一年多前,华盛顿就有关于“华为禁令”的讨论,即签署全面禁止华为电信设备进入美国通信网络的行政命令。

曾有传,特朗普会趁着今年二月巴塞罗那世界通讯大会的契机,正式签署行政命令。然而,当时中美还处于90天关税休战期,白宫选择暂不打出这张牌,并未签署命令。

特朗普还曾发推文称,美国需通过竞争,而不是通过封锁技术来取得移动通讯领域的领先地位。他的推文没有提及华为,但放出了软化封杀华为立场的信号。

不过,以上的猜测如今都成了过眼云烟。时隔三个月, “华为禁令”靴子终于落地,恰好在中美贸易谈判急转直下之时。行政命令中的语言较为宽泛,并未给“外国对手”、“危害美国国家安全的交易”、“不可接受的风险”等字眼下明确的定义。

Tuesday, April 30, 2019

'हिममानव' के पहली बार मिले निशान, भारतीय सेना का दावा

भारतीय सेना ने दावा किया है कि पर्वतारोहण अभियान टीम को पहली बार रहस्मय 'येती' यानी हिममानव के पैरों के निशान मिले हैं.

सेना के ऑफ़िशियल ट्विटर हैंडल से कुछ तस्वीरें भी साझा की गई हैं. इन तस्वीरों में बर्फ़ पर बड़े पैरों के निशान दिख रहे हैं.

एडीजीपीआई का कहना है कि मकालू बेस कैंप में 9 अप्रैल को खींची इन तस्वीरों में दिख रहे पैरों के निशान 32x15 इंच के हैं.

सेना के मुताबिक़, मकालू बारुण के नेशनल पार्क में ये कम दिखने वाला हिममानव पहले भी देखा गया गया है.

सेना की ओर से शेयर की इन तस्वीरों की सोशल मीडिया पर चर्चा है. कुछ लोग इन तस्वीरों पर हैरानी जता रहे हैं और कुछ इन्हें चुनाव से जोड़कर चुटकियां ले रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा, ''बीजेपी ज़रूर इस पर काम कर रही होगी कि कैसे हिममानवों के मुद्दे को अपने चुनावी प्रचार में इस्तेमाल करे.''

हालांकि ज़्यादातर लोग इन तस्वीरों पर चुटकियां भी ले रहे हैं.

रूद्र लिखते हैं, ''ज़रूर ये हिममानव मोदीजी को वोट करने बाहर आए होंगे.''

हैंडल से लिखा गया- ''सर एक मंदिर बनाने की ज़रूरत है.''

चौकीदार मृत्युंजय शर्मा ने सवाल किया, ''इन तस्वीरों में सिर्फ़ एक पैर का निशान क्यों दिख रहा है?''

आदर्श रस्तोगी लिखते हैं, ''आना तो मोदी को था. ये कहां से आ गया? इसका वोटर आईडी कार्ड कहां है?''

ने ट्वीट किया, ''एक पैर क्यों दिख रहा है. लगता है येती लंगड़ी खेल रहा था. तभी उसका दूसरा पैर नहीं दिख रहा है.''

तिब्बत और नेपाल की लोकप्रिय काल्पनिक कथाओं के मुताबिक़, एशिया के सुदूर पर्वतीय इलाकों में दैत्याकार बंदर जैसे जीव रहते हैं, जिन्हें येती या हिममानव कहा जाता है.

सालों से लोगों की ओर से येती को देखे जाने के दावे किए जाते रहे हैं.

साल 2013 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में की रिसर्च में ये दावा किया गया था कि हिमालय के मिथकीय हिम मानव 'येती' भूरे भालुओं की ही एक उप-प्रजाति के हो सकते हैं.

प्रोफे़सर स्काइज़ ने बीबीसी को बताया था कि येती के मिथक के पीछे हो सकता है कि वास्तव में कोई जीव हो.

उन्होंने कहा था, ''मैं समझता हूं कि वह भालू जिसे किसी ने भी जीवित नहीं देखा है, हो सकता है कि अभी भी वहां मौजूद हो.''

अमरीकी जीवविज्ञानी शॉर्लट लिंडक्विस्ट ने भी इस बारे में कुछ काम किया है. उन्होंने येती के अवशेषों का डीएनए टेस्ट के ज़रिए विश्लेषण किया था.

इन अवशेषों के नमूनों में हाथ, दांत, हाथ की त्वचा, बाल और मल मिले हैं जो तिब्बत और हिमालयी इलाकों में मिले थे.

लिंडक्विस्ट ने बीबीसी को बताया था, "जांच के दौरान उपलब्ध नौ नमूनों में से एक कुत्ते का निकला जबकि अन्य उस इलाके में रहने वाले आठ अलग-अलग प्रजातियों के भालू के हैं, जैसे एशियाई काले भालू, हिमालय और तिब्बत के भूरे भालू के."

Thursday, April 4, 2019

中美贸易谈判20年的变与不变:独家专访美国前贸易代表巴尔舍夫斯基

美国前贸易代表巴尔舍夫斯基(Charlene Barshefsky)在中国有一个鲜明的形象:脖间系着精致斑斓的丝巾、身材瘦小但内心强大的谈判专家。

她不仅在第一线目击了中美经贸关系的历史,还亲手缔造了其中一段传奇。20年前,她作为美国首席贸易谈判代表,在中国加入世界贸易组织(WTO)的关键谈判中扮演了至关重要的角色。

巴尔舍夫斯基近日接受BBC独家采访,如今依然对丝巾情有独钟的她,笑说与“不打不相识”的中国谈判代表龙永图当年结下的友谊仍在延续。

当年WTO谈判的一件轶事如今还为人津津乐道。1999年11月,经过长达六天的最后一轮艰难谈判,从美国飞到北京谈判、连日来几乎没合过眼的巴尔舍夫斯基,与白宫首席经济顾问斯珀林(Gene Sperling)拨电话给时任美国总统克林顿,通知他谈判圆满结束。他们拨打这通历史性电话的地点,竟是外经贸部大楼的女厕所。

曾有媒体报道,他们躲进女厕通话是为了防止对话被中方人员听见,巴尔舍夫斯基告诉BBC中文,那其实另有缘由:“当时收到风声的记者们开始涌入大楼,女士洗手间是唯一一个安静的地方。”

作为1997年至2001年的美国首席贸易谈判员,巴尔舍夫斯基向BBC分享了她对美中贸易关系、加入WTO以来中国经济改革的见解。她认为,贸易谈判的最终结果很可能是美国移除大部分的现行关税。

美中贸易谈判可能达成何种协议?
据《金融时报》报道,美中贸易谈判已达成九成协议,剩下的其中一个争持点在于,在多大程度上移除美国现行对华商品关税。华府希望保留部分关税以保障中国履行承诺,认为此时移除全部关税存在风险,总统特朗普近期曾表示,或长期保留对华关税。

而在北京看来,在执行承诺的同时要承担关税,并不公平。

巴尔舍夫斯基对BBC中文说,她预期在最终的贸易协议中,美国会移除大部分、或者几乎全部的关税,而中国同意在其履行承诺的一定期间,让美方保有少量关税。

另一大争持点在于如何建立监督中方达成承诺的执行机制。

“我的猜想是,谈判桌上的人想到过一百种执行机制。”

巴尔舍夫斯基指出,国际谈判经常“内外有别”,外界看来两方的立场都很极端,但在谈判桌上,双方很清楚自己和对方都必须让步,以达成某种协议。

中国明白美国会坚持“落实承诺”,而美国也清楚必须坚定督促中方落实承诺。“他们都心知肚明,那剩下的问题就是:如何在美中各自想要达成的目标间,找到合适的平衡。”

在克林顿时期担任公职的巴尔舍夫斯基直指,在奥巴马执政时期,中美间的经贸对话是“中国管控美国”,美国没有更进一步就结构性改革向中国施压,因此产出的积极结果越来越少,随即导致现今美国政府对中国说“够了”。

“中国利用了当时的对话机制,让其变得流程驱动,成立委员会、分委员会,开中期会议,但成果是非常有限的”,她说, “实际上,外国企业面临的处境变得更艰难”。

她同时强调,中美间保有经贸对话机制十分重要,但对话应是小范围的频繁会面,聚焦具体的承诺和执行结果。

“在一百人的大房间里,什么事情都不会做成。而每边三、五个关键人物的会谈能立即推进进程。”

特朗普政府采取的“美国优先”贸易政策被认为偏离WTO规定,有违自由贸易的价值观,特朗普还曾威胁退出WTO。

巴尔舍夫斯基形容,特朗普上任以来采取“非正统的”贸易政策,例如以保护美国国家安全为理由,对加拿大和墨西哥进入美国市场的钢铁和铝材产品加征惩罚性关税。

“从我们的邻居加拿大进口铝材,怎么危害美国国家安全了?”她指出,特朗普政府对某些法律的运用是不恰当的,“我认为美国最终会对此感到后悔。”

Thursday, January 31, 2019

ठंड से 8 की मौत, शिकागो में ट्रेनें चलाने के लिए पटरियों पर लगानी पड़ी आग

आर्कटिक ब्लास्ट के चलते अमेरिका में जमकर बर्फबारी हो रही है। पोलर वोर्टेक्स (ठंडी हवाओं) की वजह से 10 से ज्यादा शहरों में सर्दी बढ़ गई है। भीषण ठंड के चलते अलग-अलग इलाकों में अब तक 8 लोगों की मौत हो गई। शिकागो में पारा माइनस 30 डिग्री तक गिर गया है। नॉर्थ डकोटा में पारा शून्य से -37 डिग्री नीचे चला गया। शिकागो में ट्रेनों को चलाने के लिए ट्रैक पर आग लगानी पड़ी।

इससे पहले शिकागो में 11 बार पारा शून्य से नीचे गया था। सबसे कम तापमान 20 जनवरी 1985 को माइनस 27 डिग्री सेल्सियस रहा था। सर्दी के मामले में शिकागो ने अंटार्कटिका को भी पीछे छोड़ दिया है, जहां के कई इलाकों में पारा माइनस 20 या उससे ऊपर है।

ठंडी हवाओं के कारण शिकागो के लोगों को माइनस 50 डिग्री की सर्दी का अहसास हो रहा है। शिकागो और मिडवेस्ट इलाके में सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए।

अमेरिका की नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक, मिनियापोलिस में पारा -28 डिग्री तक पहुंच गया। यहां सर्दी 100 साल का रिकॉर्ड तोड़ने के करीब है। 10 राज्यों इलिनॉय, आयोवा, मिनेसोटा, नॉर्थ डकोटा, साउथ डकोटा, विसकॉन्सिन, कंसास, मिसौरी और मोंटाना में जमकर सर्दी है। ठंड को देखते हुए 6 राज्यों में पोस्टल सर्विस फिलहाल बंद कर दी गई।

लोगों से घरों से नहीं निकलने को कहा है। नेशनल वेदर सर्विस ने ट्वीट किया, "हालात बेहद खतरनाक हैं। अगर आप बाहर हैं और आपके शरीर का कोई हिस्सा खुला हुआ है तो 5 मिनट में शीतदंश (फॉर्स्टबाइट) होने का खतरा है। तापमान -70 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। बेहतर यही होगा कि आप बाहर रहने का समय निर्धारित कर लें।''

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को अमेरिका में करीब 3000 उड़ानें रद्द हुई हैं। अकेले शिकागो में 1000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं। इससे पहले बुधवार को अमेरिका के पांच राज्यों में 2700 उड़ानें रद्द। सबसे ज्यादा शिकागो में 1500 उड़ानें रद्द हुई थीं।

अमेरिका के 21 करोड़ (72%) लोग आने वाले दिनों में शून्य से काफी नीचे के तापमान को महसूस करेंगे जबकि 8 करोड़ (25%) लोगों के इलाके में शून्य के आसपास रहेगा।

भगवान अयप्पा सभी हिंदुओं के भगवान
भागवत ने कहा कि अयप्पा केवल केरल के हिंदुओं के भगवान नहीं हैं। यह सभी हिंदुओं के भगवान हैं। इस आंदोलन में पूरा हिंदू समाज शामिल है। संपूर्ण देश में हमें इस मामले को बताकर लोगों को जागरूक करना होगा। हिंदुओं के खिलाफ षडयंत्र चल रहा है। कहीं-कहीं षडयंत्र चल जाता है। उसका कारण हमारी कमियां हैं। पंथ, भाषा, जात-पात के नाम पर कोई व्यक्ति हमें अलग नहीं कर सके। सामाजिक समरसता का काम शुरू होना चाहिए।

केरल सरकार का दावा- 51 महिलाओं को कराया प्रवेश
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2018 में सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिला को प्रवेश की अनुमति दी थी। इस फैसले के विरोध में राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 2 जनवरी 2019 को 2 महिलाओं ने पहली बार मंदिर में प्रवेश किया। महिलाओं को पुलिस सुरक्षा में पिछले दरवाजे से प्रवेश कराया था। इसके बाद केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया था कि मंदिर में कोर्ट के फैसले के बाद 10 से 50 वर्ष के उम्र की 51 महिलाओं ने प्रवेश किया।

Wednesday, January 23, 2019

停三隧議案 陳帆:難調整續游說 擬花兩月「買時間」 待繞道顯效益爭支持

明報專訊】政府在向立法會動議「三隧分流」無約束力議案前夕,突然暫撤議案。運輸及房屋局長陳帆早上仍表示對議案有「一絲希望」,到下午稱因未能獲得足夠支持,不提議案;他說會再用一至兩個月游說議員支持,認為雙方可求同存異,但表明調整收費的空間「幾乎等於零」。政府消息表示,一兩個月後也不會有新收費方案,現時抽起動議,是希望待中環灣仔繞道一個月後全面通車,「買時間」讓議員先看清楚繞道真實效益,掌握車流量才投票。

不過,立法會內多個黨派均表明,如政府再提原方案,仍會反對。

特首林鄭月娥在去年10月《施政報告》提出三隧分流方案,曾上京游說西隧公司,提出私家車過紅隧及東隧加價至40元(現分別20元及25元)、西隧由70元減至50元,政府原定今日在立法會就方案提出無約束力議案爭取議會支持。運房局長陳帆昨晨8時許出席港台節目時仍表示對議案有「一絲希望」,到下午4時,他宣布由於未能取得足夠支持,「不會在立法會動議有關議案」,並說政府會在未來一至兩個月游說議員,之後會繼續推行相關工作。

消息指林鄭瑞士拍板撤動議

運房局:政府整體決定

有政府消息人士稱,撤回三隧分流動議是由身在瑞士的特首林鄭月娥拍板。運房局回覆本報稱,「在今日的立法會會議上不提出『三隧分流』的議案是政府整體的決定。」

陳帆認為,社會及議員都支持三隧分流的方向,只是對收費有異議,認為與議員可「求大同、存小異」,爭取妥協空間。記者多次追問方案有何調整空間,陳帆重申三隧分流方案已與西隧取得原則上同意,「調整空間幾乎等於零」,又強調現時收費方案的效果最好,若將紅隧及東隧收費下調至35元或30元,會令東隧以至紅隧更擠塞。

有政府消息表示,一兩個月後重推三隧分流,也會沿用現時的「50、40、40(元)」方案,政府沒有足夠時間與西隧重新談判新方案,現時押後動議是因為繞道通車首3日塞車,是「不正常」情况,而有議員又提出想觀察繞道通車成效才決定投票,故政府待繞道全面通車後(工程2月底前完成)、港島北交通有紓緩後,讓議員了解三隧分流方案可配合繞道的真實效益,在投票前有客觀理據。

民建聯:應研再推更好方案

工聯會:方案不改意義不大

分別手握13票和5票的民建聯和工聯會都不支持政府原方案(見表)。民建聯陳恒鑌說政府抽起議案做法可取,應再與社會、各政黨溝通,以及觀察繞道全面通車後,是否如估算般有助西隧分流,再推出更好方案。至於如何才會支持政府將來提出的三隧分流議案,陳稱要視乎方案內容。工聯會陸頌雄表示,他們不希望隧道費大增,稱若政府不改動方案,再交到立法會意義不大。

行政會議成員、新民黨主席葉劉淑儀稱,政府押後處理三隧分流議案是明智之舉,認為要時間觀察繞道交通情况,甚至待3條隧道都回歸政府才處理。西隧專營權於2023年屆滿。

手握7票和5票的民主黨和公民黨早表明反對原方案,民主黨林卓廷形容,政府不降低紅隧和東隧收費加幅是「死結」。公民黨譚文豪認為政府抽起議案是「向現實低頭」,因為不夠支持票。

Friday, January 11, 2019

अटल-आडवाणी ने भाजपा के लिए जो संघर्ष किया, ऐसा शायद ही कभी हुआ हो: शाह

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दिल्ली के रामलीला मैदान में भाजपा का दो दिवसीय अधिवेशन शुक्रवार को शुरू हुआ। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि देश के हर कोने में भाजपा को पहुंचाने के लिए अटल जी और आडवाणी जी की जोड़ी ने जो संघर्ष किया, ऐसा संघर्ष शायद ही कभी हुआ हो।

शाह ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा, "2019 का चुनाव वैचारिक युद्ध का चुनाव है। दो विचारधाराएं आमने-सामने खड़ी हैं। 2019 का युद्ध (चुनाव) सदियों तक असर छोड़ने वाला है और इसलिए मैं मानता हूं कि इसे जीतना बहुत अहम है।"

उप्र में सीटें 73 से 72 नहीं होंगी- शाह
उप्र में सपा-बसपा गठबंधन को लेकर शाह ने कहा कि एक दूसरे का मुंह न देखने वाले आज हार के डर से एक साथ आ गए हैं, वो जानते हैं कि अकेले मोदी को हराना मुमकिन नहीं है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में 50% की लड़ाई है। भाजपा उप्र में 73 से 72 सीटें नहीं लाएगी, बल्कि ये 74 हो सकती हैं।

'कांग्रेस मंदिर निर्माण में रोड़े अटका रही'

अमित शाह ने कहा, ''भाजपा चाहती है जल्द से जल्द उसी स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो और इसमें कोई दुविधा नहीं हैं। हम प्रयास कर रहे है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस की जल्द से जल्द सुनवाई हो लेकिन कांग्रेस इसमें भी रोड़े अटकाने का काम कर रही है।''

चोरों को चौकीदार ही पकड़ कर लाएगा
भाजपा अध्यक्ष ने कहा, "नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्या इन सबको लोन कांग्रेस के शासन में दिए गए, तब उनको भागने की जरूरत नहीं हुई। लेकिन जब चौकीदार सत्ता में आया तो इन्हें डर पैदा हुआ और वो बाहर भागे। इन सब चोरों को चौकीदार ही पकड़ कर लाएगा।''

2019 में 16 राज्यों में भाजपा की सरकारें
जिस भारत की कल्पना विवेकानंद जी ने की थी उस भारत को हम मोदी जी के नेतृत्व में बनाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। 2014 में 6 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें थी और 2019 में 16 राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। 5 साल के अंदर भाजपा का गौरव दोगुनी गति से बढ़ा है।

अमित शाह ने सवर्ण आरक्षण के फैसले का स्वागत किया
अमित शाह ने मोदी सरकार के सवर्ण आरक्षण के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, ''दोनों सदनों में इस बिल (सवर्ण आरक्षण) को पास कराकर सरकार ने युवाओं के सपनों को साकार करने का काम किया है। संविधान में जो अब तक के महत्वपूर्ण संशोधन हुए हैं उनमें 124वां संशोधन सबसे अहम है। दूसरा फैसला जीएसटी के कानून के तहत हुआ है। एक के बाद एक वस्तुओं के दाम कम करने और शुरुआती दिक्कतों को कम करने के लिए सरकार ने काम किया है। आज हम करोड़ों कार्यकर्ता प्रधानमंत्री जी को बधाई देते हैं।''

Monday, January 7, 2019

चीन, एप्पल और ट्रंप: सात ताक़तें जो बदल देंगी दुनिया

दुनिया में हो रहे बदलावों का अध्ययन करने वाले लेखक जेफ़ देजाख़्दा मानते हैं कि 90 के दशक में सामने आई इंटरनेट तकनीक वो आख़िरी चीज़ थी जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था और इंसानी दुनिया को बदलकर रख दिया.

देजाख़्दा इस समय एक नई किताब 'विज़ुअलाइज़िंग चेंज - अ डेटा ड्रिवेन स्नैपशॉट ऑफ़ आवर वर्ल्ड' का संपादन कर रहे हैं. ये किताब दुनिया में हो रहे दीर्घकालिक बदलावों पर नज़र डालती है.

देजाख़्दा कहते हैं कि इंटरनेट ने दुनिया को उस तरह बदलकर रख दिया है जिस तरह 15वीं शताब्दी में निकोलस कोपरनिकस के ब्रह्मांड मॉडल ने दुनिया पर असर डाला था.

कोपरनिकस के इस मॉडल में ब्रह्मांड से जुड़ी उस सोच को चुनौती दी गई थी जिसके तहत ये माना जाता था कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में स्थित है.

लेकिन व्यापारिक मॉडलों, उपभोक्ताओं की मानसिकता में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय राजनीति जैसे तत्व भी कई अहम बदलाव ला सकते हैं.

देजाख़्दा कहते हैं, "दुनिया बदलने वाली बयार किसी भी दिशा से आ सकती है और इसमें कोई शक नहीं है कि कल आने वाला तूफ़ान आज किसी न किसी रूप में कहीं न कहीं जन्म ले रहा है."

देजाख़्दा और उनकी टीम के मुताबिक़, ये सात ताक़तें आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था का चेहरा बदल सकती हैं.

कई दशकों तक दुनिया की तमाम बड़ी कंपनियों ने औद्योगिक स्तर पर उत्पादन करने से लेकर प्राकृतिक संसाधनों को हासिल करने की दिशा में काम किया.

अमरीकी कार निर्माता कंपनी फोर्ड, जनरल इलेक्ट्रिक और तेल क्षेत्र की कंपनी एक्सॉन ऐसी ही कुछ कंपनियों में शामिल हैं.

लेकिन अब सूचना क्रांति का दौर है. और दुनिया के शेयर बाज़ारों में सबसे ज़्यादा अहम कंपनियां तकनीक क्षेत्र की कंपनियां ही हैं.

साल 2018 की पहली तिमाही में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ़्ट और टेनसेंट सबसे प्रभावशाली कंपनियां बनी रहीं. लेकिन पांच साल पहले पांच सबसे अहम कंपनियों की लिस्ट में केवल एप्पल ही शामिल थी.

चीन की आर्थिक अहमियत को लेकर पहले भी बात हो चुकी है. लेकिन देजाख़्दा चीन की आर्थिक और तकनीकी विकास की ओर ध्यान खींचना चाहते हैं.

चीन के कुछ शहरों का आर्थिक उत्पादन इतना ज़्यादा है कि वह कई देशों के आर्थिक उत्पादन पर भारी पड़ता है.

चीन की येंगत्सी नदी के किनारे बसे शहर शंघाई, सूजो, खांग्जो, वूशी, नेनटॉन्ग, नेनजिंग, चांगजो इसी विकास का उदाहरण हैं.

इन शहरों का भौतिक विकास इनके आर्थिक विकास के साथ समान रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है.

ये माना जाता है कि साल 2030 तक चीन अमरीका को पछाड़कर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी.

आने वाले कुछ दशकों में शहरी आबादी में तेज़ी से होती बढ़त वैश्विक अर्थव्यवस्था को बदलकर रख देगी.

सयुंक्त राष्ट्र संघ के अनुसार, चीन और कई पश्चिमी देशों में जन्म दर में एक स्थिरता नज़र आएगी. वहीं, अफ़्रीकी और दूसरे एशियाई देशों में आबादी में बढ़ोतरी के साथ-साथ तेज़ी से शहरीकरण होता हुआ दिखेगा.

इससे ऐसे कई शहर अस्तित्व में आएंगे जहां रहने वालों की संख्या एक करोड़ से ज़्यादा होगी. यूएन के मुताबिक़, पिछले साल ऐसे शहरों की संख्या 47 थी.

अनुमान के मुताबिक़, इस सदी के अंत तक अफ़्रीका में 13 ऐसे शहर अस्तित्व में आएंगे जो कि न्यू यॉर्क सिटी से भी बड़े होंगे.